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विधिक जागरूकता न्याय को सर्वसुलभ बनाने का माध्यम –  कुलदीप सिंह

मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज में भारत के 71वें संविधान दिवस पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन किया गया। विदित हो 26 नवम्बर 1949 को भारत की संविधान सभा ने अपने स्वतंत्र भारत के लिये बनाये गये संविधान को अपनाया था। इस कार्यक्रम की संयोजिका एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना बिश्नोई ने इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि इस संवेदीकरण कार्यक्रम का विषय मौलिक कर्तव्य और मौलिक आधिकारों के सन्दर्भ में मौलिक कर्तव्यों की प्राथमिकता देना हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ संविधान की आत्मा यानि प्रस्तावना के उच्चारण से की गई।

सुभारती विधि संस्थान के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल भारतीय ने कार्यक्रम में उपस्थित स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.पी. सिंह, सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज के निदेशक श्री राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायामूर्ति, प्रयागराज हाइकोर्ट) तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री कुलदीप सिंह एवं जिला व सत्र न्यायालय, मेरठ की न्यायिक मजिस्ट्रेट बिन्नी बालियान का परिचय व स्वागत करते हुए किया। उन्होंने अपने उदबोधन में कहा कि देश के संविधान ने हमें जितने कर्तव्य दिये हैं उसी अनुसार मौलिक अधिकार भी नागरिकों के लिये दिये गये हैं लेकिन लोगों ने कर्तव्यों को तो याद रखा और अधिकारों को भुला दिया। विधिक साक्षरता के अभाव में इस भावना को और अधिक बल मिला जबकि संविधान के अनुसार कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिये थी। यह आज भी सम्भव है यदि हम आम नागरिकों को विधिक साक्षरता के माध्यम से जागरूक कर व्यक्ति को उसके कर्तव्यों से जोड़े।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) वी.पी. सिंह ने उपस्थित सभी शिक्षकों, छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान दिवस की बधाई देते हुए कहा कि विधि के छात्रों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे आम नागरिकों को विधि के सन्दर्भ में साक्षर करें और उन्हें देश के प्रति संवेदनशील बनाये।

सुभारती लॉ कॉलिज के निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायामूर्ति, प्रयागराज हाइकोर्ट) ने कार्यक्रम की सफलता के लिये आर्शीवाद प्रदान करते हुए कहा कि संविधान की जानकारी न हो पाना ही भारतीयों के लिये सबसे बड़ी चुनौती है। हमें संवैधानिक साक्षरता को बढ़ाना होगा तभी स्वतन्त्रता और समानता के साथ साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की सुनिश्चितता हो पायेगी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप सिंह ने भारतीय संविधान दिवस की बधाई देते हुए डॉ. भीमराव अम्बेडकर को याद करते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक न्याय समाज के वंचित वर्गो को दिलाने के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गम्भीरता से प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में सस्ता एवं सुलभ न्याय कमजोर एवं वंचित वर्गों को उपलब्ध कराया जा रहा है साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता के माध्यम से वंचित वर्ग व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे है। यह भी कोशिश की जा रही है कि छोटे-छोटे सिविल मामलें केवल समझोते के माध्यम से ही निपटा दिये जाये ताकि मुकदमों की संख्या कम हो सकें।

जिला व सत्र न्यायालय, मेरठ की न्यायिक मजिस्ट्रेट बिन्नी बालियान ने अपने सम्बोधन में महिलाओं के अधिकारों की बात कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में अपनी बात रखी। उन्होंने तमाम सामाजिक बुराईयों का जिक्र किया जिनमें महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति थोड़ी बदली तो है लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

इस कार्यक्रम की संयोजिका एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना बिश्नोई ने मौलिक अधिकारों की व्याख्या की और उनकी महत्ता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम में उपस्थित माननीय कुलपति महोदय तथा अन्य अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सुभारती विधि संस्थान के निदेशक राजेश चन्द्रा सर का धन्यवाद ज्ञापित किया इसी के साथ उन्होंने प्रो. एस.के. सिंह व कॉलिज के डीन प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल भारतीय सहित सभी शिक्षकों और गैर शिक्षकों कर्मचारियों का कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्र गान के तदा उपरान्त इस कार्यक्रम का समापन किया गया।

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