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एसिड अटैक महिलाओं पर किया जाने वाला सबसे भयानक अपराध : न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी

मेरठ-भागीदारी जन सहयोग समिति और राष्ट्रीय सेवा योजना (युवा मंत्रालय- भारत सरकार की पहल) गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ” एसिड अटैक की रोकथाम ” पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र में एसिड अटैक को महिलाओं पर किया जाने वाला सबसे भयानक अपराध बताते हुए न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने कहा कि लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता विशेष रूप से बच्चों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज एक ऐसे समाज के निर्माण की आवश्यकता है जो ऐसी घटनाओं से न केवल मुक्त हो अपितु इस तरह के हमले के शिकार के प्रति संवेदनशील भी हो l वेबिनार में दिल्ली एवं अरुणाचल प्रदेश की राज्य सेवाएं प्राधिकरणों की प्रधान भागीदारी रही। सत्र के सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ राजेंदर धर भागीदारी जन सहयोग समिति के संरक्षक एवं कुलपति लिंगया यूनिवर्सिटी ने एसिड अटैक की रोकथाम एवं जागरूकता विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता का उल्लेख किया।

उद्घाटन सत्र के अध्यक्षीय भाषण में न्यायमूर्ति रूमी फूकान न्यायाधीश गौहाटी हाई कोर्ट ने लोकतांत्रिक समाज के एक संवेदनशील नागरिक होने के नाते एसिड एसिड पीड़ितों की मदद करने के लिए सभी के योगदान की आवश्यकता पर बल दिया।

न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सचिव दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण नम्रता अग्रवाल ने महिलाओं अधिकारों के संरक्षण में पूरे देश में की राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एसिड अटैक पीड़िता को प्राधिकरण से निशुल्क कानूनी सहायता देता है और आवश्यकता पड़ने प्राधिकरण के खर्चे पर निशुल्क अधिवक्ता की सेवाएं भी प्रदान की जाती है। साथ – साथ पीड़िता को मनोविज्ञानिक -परामर्श के द्वारा जीवन के प्रति भावनात्मक लगाव एवं समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि एसिड अटैक पीड़िता, उसके परिवार का सदस्य या थाना प्रमुख द्वारा आवेदन करने या प्राधिकरण के संज्ञान में आने पर प्राधिकरण द्वारा 15 दिन में पीड़िता को एक लाख रुपया अंतरिम सहायता के रूप में दिए जाते है ताकि तुरंत इलाज इत्यादि की व्यवस्था हो सके और उसके बाद अगले दो महीने में दो लाख रुपया की सहायता और दी जाती है।
न्यायाधीश एवं सदस्य सचिव मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण गिरी बाला सिंह प्राधिकरण द्वारा गोद लिए 181 गॉवों में महिला अधिकार जागरूकता अभियान पर प्रकाश डालते हुए एसिड अटैक पीड़िताओं के पुनर्वास एवं उन्हें समाज के मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की lकार्यक्रम के मख्य संयोजक , सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं समिति महासचिव विजय गौड़ ने कहा कि तेजाब से सिर्फ चेहरा नहीं इंसान की आत्मा भी जलने लगती है ऐसे में पीड़िता को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बनना ईश्वर की सच्ची पूजा है भागीदारी जन सहयोग समिति के संरक्षक एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक ए0एस0खान ( सेवा निवृत आई पी एस ) ने उद्घाटन सत्र के सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया

तकनीकी सत्र में अपने स्वागत भाषण में कुलपति गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी ने कहा कि तेजाब हमले जैसे भयानक अपराधों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है।उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि हमारा देश महिलाओं को देवी का दर्जा देता है लेकिन फिर भी एसिड अटैक के मामलों में सबसे ऊपर है l न्यायाधीश एवं सचिव दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण कंवल जीत अरोड़ा ने एसिड हमले की उत्पत्ति सामाजिक दंभवाद और पितृसत्तात्मक मानसिकता में हुई है , इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि इन हमलों से पता चलता है कि कैसे आरोपी महिलाओं को पुरुष समकक्ष की तुलना में निचले पायदान पर देखता है l इसलिए इस तरह की मानसिकता को बदलने की जरूरत है क्योंकि ये पीड़ित की पहचान को पूरी तरह से चकनाचूर कर देती हैं और साथ ही समाज द्वारा पीड़ित को दूसरे तरीके से प्रताड़ित भी करती हैं। उन्होंने बताया कि 119 एसिड अटैक पीड़ितों को 2.18 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि के साथ-साथ पुनर्वास कदम जैसे कि उन्हें कर्मचारियों के रूप में नियुक्त करना जैसे रोजगार अवसर भी प्रदान किये है ।
प्रीति भारद्वाज दलाल अध्यक्ष हरियाणा राज्य महिला आयोग ने साहसी एसिड अटैक पीड़िता की भावना को कविता के माध्यम से व्यत्क करते हुए आयोग द्वारा गावों में महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता प्रयासों का विस्तृत उलेख करते हुए बताया के आजकल एसिड मुह पर ही बल्कि एसिड पिलाया जाता है जिसके लिए पृथक क़ानून लाने के आवश्यकता है क्योंकि ऐसे अपराध को एसिड अटैक के कानूनी प्रावधानों में शामिल नहीं किया गया है l महानिदेशक ( दूरदर्शन ) भारत सरकार मयंक अग्रवाल ने जन जागरूकता अभियान में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दूरदर्शन राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण के अनेकों कार्यक्रम आयोजित कर रहा है और मेरा हक के अगले एपिसोड में एक महिला सशक्तिकरण शो एसिड अटैक सर्वाइवर्स पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स की कहानी एवं प्रयासों को साझा करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें मीडिया में उजागर कर मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। ऐश्वर्या भाटी अति० सॉलिसिटर जनरल सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने कहा कि निर्भया कांड के बाद एक सुनामी की तरह जन जागरूकता आई और लोग महिलाओं के लिए शुन्य सहनशक्ति की मांग करने लगे l निर्भया संशोधन अधिनियम में एसिड फेंकने के प्रयास को भी गंभीरता से लिया गया l उन्होंने अधिनियम संशोधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एसिड अटैक जैसे मामले रूढ़िवादी समाज में पुरुष वर्चस्व और पुरुष एवं महिलाओं में असमान शक्ति का कारण है l आज ऐसी मानसिकता को बदलने की और महिलाओं के अधिकार एवं जागरूकता के लिए लंबी लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है l मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा न्यायाधीश (सेवानिवृत ) सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया नैतिक शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण कानूनी शिक्षा के साथ साथ लड़के लड़कियों को नैतिक रूप से मजबूत होने के लिए भी तैयार करे l लड़कियों को सजग रहना होगा कि यदि उसका सम्बन्ध ऐसे लड़के से हो गया है जो अपराधी प्रवृति का है तो उसे तुरंत छोड़ना होगा l उन्होंने कहा कि एसिड अटैक जैसे अपराध रोकने के लिए हमें उपाय सोचने है और उन्हें साँझा भी करना है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो। इस अवसर पर प्रोफेसर साकेत कुशवाह कुलपति राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश , प्रोफेसर वी० पी० सिंह कुलपति स्वामी विवकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश , प्रोफेसर जसबीर ऋषि कुलपति डी ए वी यूनिवर्सिटी पंजाब एवं प्रोफेसर संगीता शुक्ल कुलपति जीवाजी यूनिवर्सिटी मध्य प्रदेश अपने लाइव सन्देश में एकमत से एसिड अटैक रोकथाम में जन जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
विजय गौड़ मुख्य संयोजक ने बताया कि वेबिनार से देश के 26 राज्यों से 8000 लोगों ने जुड़ कर जागरूकता अभियान के प्रति अपनी आस्था का परिचय दिया। कार्यक्रम आयोजन एवं कानूनी जागरूकता अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि प्रोफेसर डॉ. संध्या गर्ग एवं डॉ राजलक्ष्मी जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज दिल्ली , डॉ बी0 .वी0 रमना रेड्डी एवं डॉ. शिवानी गोस्वामी गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी दिल्ली , डॉ परमिंदर कौर दिल्ली यूनिवर्सिटी, डॉ. स्मृति खोसला डी ए वी यूनिवर्सिटी पंजाब , डॉ सुषमा जोशी बी पी एस महिला यूनिवर्सिटी हरियाणा , डॉ रवि कांत अदालत वाले जीवाजी यूनिवर्सिटी मध्य प्रदेश , डॉ. अनिल मैनी राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश , डॉ.वैभव भारतीय स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी उत्तरप्रदेश , डॉ. विजय आनंद दुबे एवं डॉ. कावेरी भारद्वाज के० आर० मंगलम यूनिवर्सिटी हरियाणा , डॉ. प्रदीप डिमरी जे0 सी0 बोस यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी हरियाणा , मैथली शरण गुप्ता( आई० पी० एस० सेवानिवृत ) राष्ट्रीय अध्यक्ष अपराध मुक्त भारत मिशन , सुश्री अनुपमा ह्यूमन फाउंडेशन एवं मीडिया पार्टनर संस्थाओं के प्रमुख संजय उपाध्याय मदर लैंड वौइस् समाचार पत्र, राजीव निशाना समाचार वार्ता , हामिद जनमत समाचार , मनोज पांडेय वीमेन एक्सप्रेस समाचार पत्र , गौरव तिवारी पुलिस पत्रिका , रेशु शर्मा एवं प्रतीक पांडेय लीगल जंक्शन (लीगल मीडिया प्लेटफार्म ) , राहुल दृश्यम मीडिया प्रोडक्शन , वंदन सक्सेना उप महानिरीक्षक एवं नूतन सिंह उप निदेशक बी0 पी 0आर0 एंड डी0 ( गृह मंत्रालय-भारत सरकार ) , अंजुम सिद्दीकी संयुक्त निदेशक( शिक्षा ) नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् , सुश्री पुष्पा उप शिक्षा अधिकारी ( मुख्यालय ) दिल्ली नगर निगम , डॉ. ज्योति गौड़ एवं विशाल भारत भागीदारी जन सहयोग समिति को प्रशंसा पत्र से सम्मानित करने की घोषणा
की।
अंत में मैथली शरण गुप्ता ( सेवा निवृत आई० पी० एस० ) पूर्व पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अपराध मुक्त भारत मिशन ने मिशन द्वारा भारत को अपराध मुक्त बनाने के रचनात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

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