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मेरठ में हालात खतरनाक : आठ दिन में कोरोना से 16 जिंदगी खत्म

कोरोना संक्रमण से बढ़ते मौत के आंकड़ों ने उड़ाई स्वास्थ्य विभाग की नींद

मेरठ: कोरोना ने आठ दिन में 16 जिंदगी छीन लीं। संक्रमण के चलते लगातार हो रही मौतों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की नींद उड़ा कर रख दी है। शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी संक्रमितों की मौत की रफ्तार पर ब्रेक लगता नजर नहीं आ रहा है।

हालांकि सीएम योगी बार-बार एक-एक मौत का हिसाब लिए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन संक्रमितों की मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। आए दिन प्रशासनिक अफसरों व स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की गाड़ियां मेडिकल की ओर दौड़ती रहती हैं, लेकिन इसके बाद भी हालात काबू आते नजर नहीं आ रहे हैं। मेडिकल प्रशासन की अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ रहा है, लेकिन संक्रमण से होने वाली मौतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अफसरों के लिए ये एक बड़ी चिंता का कारण बनी हुई हैं।

आंकड़े दे रहे गवाही

कोरोना से होने वाली मौतों की यदि बात की जाए तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले आंकडेÞ बार-बार बता रहे हैं कि संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों पर कोई काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार मौतें जारी हैं।

बेबस है अफसरों का अमला

शासन के नोडल अधिकारी, मंडलायुक्त व जिलाधिकारी सरीखे प्रशासन के अफसर, सीएमओ और मेडिकल प्राचार्य समेत तमाम बडे अफसरों का अमला भरपूर प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके बाद भी यदि संक्रमण से होने वाली मौतों की बात की जाए तो हालात काबू आते नहीं दिखाई दे रहे हैं। आठ दिन में 16 मौतों का आंकड़े को स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी गंभीर मान रहे हैं।

शासन को जाती है डेली रिपोर्ट

कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों को लेकर शासन की चिंता को इसी बात से समझा जा सकता है कि मेरठ हाईरिस्क जनपदों में शामिल होने की वजह से शासन को डेली मौतों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग से जाती है।

प्रयासों में कोई कमी नहीं

कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत को गंभीर मानते हुए मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि प्रत्येक मरीज का जीवन बहुत ही कीमती है। हमारे डाक्टर गंभीर मरीजों का जी जान से इलाज करते हैं, लेकिन कई बार मरीज को लास्ट स्टेज पर भेजा जाता है। उस वक्त काफी कम विकल्प ही बचते हैं, लेकिन फिर से मरीजों को बचाया जा सकता है।

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